swarnvihaan

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महाशक्ति…..

Posted On 7 Apr, 2016 Hindi Sahitya, Junction Forum, Social Issues में

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हे महा शक्ति
हे कल्याणी…
ज्योतिर्मय अमृत
कलश छलको…
जीवन में रस बरसो बरसो…
मैं दीप सुमन
परिमल विहीन….
कुमकुम अक्षत
नैवेद्य हीन…
मैं शक्ति हीन
मैं तेज हीन..
सुषमा विहीन
सौरभ विहीन…..
मैं हृत सर्वस्वा.. अकिंचना ..
इन चरणों में
अब शरणों में..
हे क्षमा शिवा
ममता करुणा…
अभिशाप पाप
हर लो ..हर लो…
स्वीकार आज…. कर लो कर लो
भावों में श्रद्धा
सी बिखरो..
निखरो मन में
उज्ज्वलता सी…
स्वप्नों में छाया
सी लहरो…
चेतनता में
चंचलता सी…
शुचिता सी
साँसों में बहती ..
उषा सी प्राणों
के तम में…
हे सरस्वती
वरदान मयी…
वाणी अमृत
सरसो सरसो..
हे महादेवि हरषो हरषो..
अर्चना वन्दना
ऋचा मन्त्र ..
सब अंग साधना
अश्रु बनी …
अभिलाषाएँ..आकाक्षायें
आशीष नही
अनुताप बनी…
सर्वस्व समर्पित
अभिनंदन
आलोक प्रभा
धारा उर में….
हे शक्ति मयी..
अनु राग मयी..
सौभाग्य राग
भर दो भर दो….
सम्पूर्ण आज कर दो कर दो….



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vikaskumar के द्वारा
April 12, 2016

शिल्प एवं भाव दोनों दृष्टि एक बहुत अच्छी कविता . आधुनिक समय ऐसी अच्छी कविताएँ कम पढ़ने को मिलती हैं .

ranjanagupta के द्वारा
April 13, 2016

विकास जी बहुत बहुत आभार …यदि ऐसी कविताओ कों अभी भी लोग पसंद करते तो ब्लाग पर कविता का ये का हाल न होता … आपका स्वागत …अब लोग करेंट टापिक में ही केवल विश्वास रखते है


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