swarnvihaan

कविताये // आमजन स्त्री विमर्श की !!! कहानियाँ //मार्मिक प्र वंचनाओं की !!! विचार // दमित आक्रोश असंगतियो के !!! , लेख // पुनर्जागरण के !!!

132 Posts

1415 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15855 postid : 1145749

किसान की चिठ्ठी.......

Posted On: 13 Mar, 2016 social issues,Junction Forum,Hindi News में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

किसान की चिठ्ठी…!

~~~~~~~~~~~~~

मैं एक किसान हूँ.

तुम्हारी पाँव की ठोकरों में मेरा खेत हो सकता है..

मगर मेरी मुठ्ठी में तुम्हारा वजूद है..

सुबह से शाम तक

जब तुम अपनी उंगलियों से

सर्च करते हो …आभासी दुनिया के तर्क..कुतर्क

तब तक मैं अपने खून को

पसीना बना कर बहाता हुआ

तुम्हारे पेट के लिए…

धरती से उगा ही लेता हूँ ..कुछ अन्न के दाने

बचा ही लेता हूँ .अपने लिए भी कुछ भूख और प्यास..

जब ज्वार ..गेंहूँ ..दलहन की फसलें

हो जाती है असमय बाढ़ या सूखे की शिकार

और लहलहाती हरी बालियों को …

पाला मार जाता है..

तब भी खाली पेट सेवार खाकर भी जीना जारी रखता हूँ..

और तब भी जब

पढ़ी लिखी शहरी जमात

फेंक देती है ..कुन्टलों अन्न कूड़ेदान में..

बजबजाती नालियों में …

जिसके एक एक दाने पर हम किसानों की

बेहिसाब मेहनत लिखी होती है…

और तब भी साँस लेता रहता हूँ..

जब सरकारी गोदामों में ..खुले आसमान के नीचे

वर्षा से सड़ जाता है..

करोड़ो खेतिहरों की दधीचि हड्डियों को गला कर

उगाया गया अन्न का विशाल भण्डार…

तब भी चुपचाप

घुटकते आँसुओं के बीच

फिर से एक बार

उम्मीद की नई फसल बोता रहता हूँ..लेकिन

हर बार छले जाते है हम किसान ..ही

कभी बम्पर पैदावार का लालच देकर..

विदेशी खादें ..

कभी हाइब्रिड के नाम पर

स्वाद..पोषण से रहित बीजों की खेप की खेप…

कभी

जमीन को जहरीला ..बंजर बनाते

कीटनाशकों के रक्तबीजी हमले…

और अभी तो जी एम फसलों का भस्मा सुरी ..

अंतिम आघात बाकी बचा है..

धीरे धीरे टूट जाती है हिम्मत

अपनी जमीन की ऊसरता…दीनता और निर्बलता

के साथ ही ऊसर ..दीन और निर्बल

हो जाते हम किसान..भी..

बस ठीक इसी समय

सूदखोर बैंकों के खूनी पंजे

हमारी और हमारी छत ..विछत जमीनों की गर्दन पर

कसने लगते है..

हमारे कमजोर सीनों पर

अपने नुकीले दांत गड़ा कर व्यवस्था के वे पिशाच…

पी जाते है

बचा खुचा हमारे जिस्मों का दो चार …

कतरा पीला खून भी….



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

26 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
March 13, 2016

प्रिय रंजना जी किसान की बिगड़ती हालत को देख कर बजट में उनके लिए लिए विशेष व्यवस्ता की है आपने उन पर कविता लिख कर सबका ध्यान उनकी परेशानियों की तरफ खींचा है

PRAVEEN के द्वारा
March 14, 2016

अद्भुत आदरणीया ,किसान अवश्य ही दधीचि ही है ,उसी पर धर्म और धरा टिकी है |

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2016

शोभा जी … बहुत बहुत आभार …किसान की पीड़ा बहुत पुरानी है ..कानून एक राजनैतिक ..सामाजिक चेतना का एहसास भर है अभी..अभी भी हजारों हजार किसान अपनी अभिशप्त दशा कों जी रहे है ..और जाने कब तक जीते रहेंगे…

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2016

प्रवीन जी ..आपका अतिशय आभार …

sadguruji के द्वारा
March 14, 2016

आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत सुन्दर और किसानों की सभी समस्याओं को उजागर करती रचना ! मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये और यह आग्रह भी कि इस मंच पर लिखतीं रहें ! सादर आभार !

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2016

सादर …साभार…सद्गुरुजी ….

ashokkumardubey के द्वारा
March 16, 2016

dukh ki baat yahi hai ki kisano ki halat par charcha bhi hoti hai aur sarkari paisa kharcha bhi hota hai par un paison ko kisano tak pahuchne hi nahi diya jata

ranjanagupta के द्वारा
March 17, 2016

अशोक जी..बहुत बहुत धन्यवाद ….आपकी बात बहुत सही है..लोग समझ रहे है किसानो की मुसीबतें टल गयी अब तो उनका बीमा हो गया..पर वास्तव में ये सब दूर के ढ़ोल है ..किसान की हालात कब सुधरेगी..पता नही…

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 17, 2016

रंजना जी ,दर्द ,पीड़ा घुटन अब साहित्य से फिल्मों से दूर हो चूका है | किसान समृद्ध हो चुके हैं |आधुनिक उपकरण से युक्त किसानी हो चुकी है | पता नहीं क्यों लेखक और नेता इसको बनाये रखना चाहते हैं | रंजना जी खुश रहो और खुशहाली दर्शाओ तभी ओम शांति शांति अनुभव होगी 

ranjanagupta के द्वारा
March 17, 2016

हरिश्चंद्र जी..आपके हिसाब से तो अख़बार झूठे है..किसानो की बेहिसाब आत्महत्याएँ महज खुशहाली अधिक होने से है..ओह….बहुत तकलीफ में किसान है.. किस दुनिया की बातें कर रहे है आप?बहुत कष्ट मेँ देश की सेना है…बस न खुश रह पाती हूँ ..न खुशियों की बात .कर पाती हूँ..कोई खुश नही बस मोटे मोटे कुछ अरबपतियों..मंत्रियों.. और अभिनेताओं के सिवा… अब तो भारत माँ भी रो रही ओवैसी …कन्हैया जैसे गद्दारों को जन्म देकर…..सादर..साभार

sadguruji के द्वारा
March 17, 2016

आदरणीया रंजना जी ! हार्दिक अभिनन्दन और ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ चुने जाने की बहुत बहुत बधाई ! फिर वही आग्रह करूंगा कि इस मंच पर भी लिखती रहें ! किसानों की दीनहीन दशा का आपने बहुत सही चित्रण अपने काव्य में किया है ! बल्कि मैं तो कहूँगा कि देश के ८० प्रतिशत से भी अधिक किसानों की वास्तविक स्थिति आपके सजीव चित्रण से भी ज्यादा बुरी है ! जवान भी सीमा पर आहत है ! उसे बलात्कारी कहने वाले और भारत माता की जय बोलने से इंकार करवाले आजकल मीडिया की सुर्ख़ियों में हैं ! बस आप यूँ अपनी आवाज बुलंद करती रहिये ! शुभकामनाएं और शुभ आशीर्वाद ! सर्वोत्तम और सटीक कविता की प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

jlsingh के द्वारा
March 17, 2016

सर्वप्रथम साप्ताहिक सम्मान की बधाई! इतनी ख़ूबसूरती से किसानों की दुर्दशा का चित्रण कौन कर सकता है? सबकुछ जैसे आंखो देखा हाल अन्नदाता की चिंता छोड़ दी गयी है प्रकृति भी आजकल किसानों पर ही मेहरबान है असमय बारिश के कारण लहलहाती फसल को बर्बाद होते देख किसान खों के आंसू रोता है आदरणीया तब भी उस ेमुआवजे की राशि कब और कितनी कैसे मिलती है न आपसे छुपी है न हमसे! केवल जाया जवान जय किसान या भारत माता की जय कहने से कुछ नहीं होगा. असली सम्मान तो ये कृषक ही करते हैं इस धरती मन की और रक्षा तो जवान करते ही हैं. हमतो उनका गुणगान करने में भी संकोच करते हैं. बहुत बहुत अभिनंदन!

ranjanagupta के द्वारा
March 18, 2016

जवाहर जी…बहुत बहुत आभार….आपकी प्रतिक्रिया से अचानक पता चला…. कि मुझे ‘बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक ‘चुना गया है…बहुत अच्छा लगा….बस संयोगवश ही जागरण मंच पर गयी…. बहुत बहुत.आभार जागरण जंक्शन का …और आप सभी के मान का…प्रेम का…

ranjanagupta के द्वारा
March 18, 2016

सद्गुरुजी बहुत बहुत अभिनदंन आपका….मुश्किलें बनी हुयी है ..पर मैंने थोडा सा समय इस मंच के लिए फिर से निकालना शुरू किया है…रचनात्मकता बाकी जगह बहुत बढ़ गयी है…बहुत सही कहा आपने… किसान और जवान के कारण ही हम है…हमारा भारत महान है..और इसी भारत के टुकड़े टुकड़े करने वाले भी..यही जिन्दा है…अफ़सोस ….किसानों की ..जवानों की…तकलीफों का अंदाज कोई नही लगा सकता…कोई भी कानून बनाना आसान है ..पर उसका पूरा फायदा जरूरत मन्द तक पहुंचाना मुश्किल….

ashasahay के द्वारा
March 19, 2016

बहत सुन्दर।

rameshagarwal के द्वारा
March 19, 2016

जय श्री राम राजना जी किसानो का दर्द दिखती बहुत सुन्दर रचना गांधी जी गावो और किसानो का विकास चाहते नेहरूजी ने नहीं ध्यान दिया आज कितनी समस्या है की हजारो किसान आत्महत्या करने में मजबूर है सरकार और राजनेताओ पर कुछ असर नहीं होता २००९ में मुवाजा बाँट कर सत्ता ज़रूर हासिल की देश का अन्नदाता आत्महत्या करने को मजबूर है नेता लोग अपने और परिवार के लिए चिंता करते यदि टीक से योजना बनाई जाती तो गावो से शहरो का पकयाँ न होता.सफ्ताह का सबसे श्रेष्ट

ranjanagupta के द्वारा
March 19, 2016

रमेश जी ..बहुत बहुत आभार… साधुवाद आपको

ranjanagupta के द्वारा
March 19, 2016

धन्यवाद …

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
March 19, 2016

रंजना जी बुरा न मनो होली है | होली की शुभकामनाएं …आपका दर्द ..दर्द निवारक खोज ले ओम शांति शांति

OM DIKSHIT के द्वारा
March 19, 2016

आदरणीया रंजना जी,नमस्कार. मैं नहीं जनता की आप किसान हैं या नहीं ,लेकिन आप ने किसानों की व्यथा को नज़दीक से देखा या सुना जरूर है.उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.बेस्ट ब्लॉग की बधाई.होली की शुभकामना.

ranjanagupta के द्वारा
March 19, 2016

हरिश्चन्द्र जी …बुरा मानने की कोई बात नही .. आपका तो ये अंदाज ही है..होली की बहुत बहुत शुभकामनाये …

ranjanagupta के द्वारा
March 19, 2016

ॐ दीक्षित जी..शायद पहले से आप इस ब्लाग पर है ..जब मै भी थी ..आपका अनुमान सही है ..मै किसान तो हूँ ..पर किसानी नही करती ..पर व्यथा किसानो की बहुत पास से देखी है …वैसे भी मेरी संवेदना की परिधि में पूरा विश्व है …तभी तो सबका दर्द इतना अपना लगता है ..कि बैचेन हो जाती हूँ …सादर .. साभार …

yamunapathak के द्वारा
March 19, 2016

रंजना जी बहुत ही सुन्दर ब्लॉग है और आपको साप्ताहिक सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाई

ranjanagupta के द्वारा
March 20, 2016

आपका बहुत बहुत अभिनदंन ..यमुना ..जी…

rajanidurgesh के द्वारा
March 20, 2016

प्रिय रंजनाजी किसान की समस्या को अत्यंत ही यथार्थ रूप से लिख कर आपने अत्यन्त सराहनीय कार्य किया है अति विशिष्ट रचना .बधाई

ranjanagupta के द्वारा
March 20, 2016

रजनी जी … आत्मिक आभार …


topic of the week



latest from jagran