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हवा की सरहदें...

Posted On: 10 Mar, 2016 कविता,Junction Forum,Hindi Sahitya में

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हवा की सरहदें…
~~::::::::~~
हवा की सरहदों पे तुम हो..
दीप की कतार से…
या फैसले के हक में तनी हो
कलम की धार से…

है तेवरों में तल्खियाँ
जूनून है खुमार है..
गलत है या सही
यहाँ गुबार ही गुबार है..
जो तख्तियों पे लिख गए है
वक़्त के विचार से…

कदम कदम चले तो
कोई मंजिलें भी तय करें..
सफर के दर्द को
किसी से बाँट करके कम करे…
मगर न कोई साथ दे..
तो क्या उमर गुजार दे…?

कहा सुनी बहुत हई
मिला न रास्ता कहीँ…
अगर न चल सको
हमारे साथ साथ तुम अभी….
कोई वजह नहीँ मगर
की हम तुम्हें बिसार दें..

चमक रहा नही
गगन में सूर्य कोई भी नया..
उम्मीद का सिरा
उलझ के उलझनों में रह  गया…
है रिक्तियों में रंग भी
गरीब के उधार से….



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
March 13, 2016

उम्मीद का सिरा उलझ के उलझनों में रह गया… है रिक्तियों में रंग भी गरीब के उधार से…. सुन्दर अभिव्यक्ति रंजना जी

ranjanagupta के द्वारा
March 13, 2016

आभार ..यमुना जी..बहुत बहुत स्वागत मेरे ब्लाग पर .. बहुत बहुत दिनों बाद …

Jitendra Mathur के द्वारा
March 13, 2016

अत्यंत सुंदर भावाभिव्यक्ति रंजना जी । हृदय को स्पर्श कर गए आपके उद्गार । हार्दिक अभिनंदन ।

ranjanagupta के द्वारा
March 13, 2016

जितेन्द्र जी … आभार ..समर्थन हेतु साधुवाद …

mrssarojsingh के द्वारा
March 14, 2016

सफर के दर्द को किसी से बाँट के काम करें खूबसूरत अहसास खूबसूरत शब्दों में पिरोये हैं आपने रंजना जी बधाई स्वीकार करें

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2016

सरोज जी..बहुत बहुत धन्यवाद …

sadguruji के द्वारा
March 14, 2016

चमक रहा नही गगन में सूर्य कोई भी नया.. उम्मीद का सिरा उलझ के उलझनों में रह गया… है रिक्तियों में रंग भी गरीब के उधार से….! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना ! आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! उत्कृष्ट साहित्यिक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई !

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2016

आदरनीय सद्गुरुजी …..आपका बहुत बहुत अभिनंदन ….बहुत दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली …और बहुत दिनों बाद कुछ लिखना मैंने ब्लाग पर शुरू किया ..नियमित रहू……सम्भवत:

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2016

अशेष अभिन्दन आपका सद्गुरुजी …साहित्य ही तो मेरी जमा पूंजी है…


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