swarnvihaan

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स्त्री...!

Posted On: 7 Mar, 2016 कविता,Junction Forum,Special Days में

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महिला दिवस 8 मार्च पर विशेष ..
~~~~~~~~~~~~~~~~
स्त्री..
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तुम पुरुष नही हो सकते
मेरे स्त्री हुए बिना…
उम्मीदों की छोर
उँगलियों से पकड़े .
धूप मिली थी..
मग़र कोहरे को जकड़े ..
तुम सूर्य नही हो सकते
मेरे उषा हुए बिना…
आँसू चुगली करते थे
तकलीफों की..
नही खरीदी दवा
कोई भी चोटों की..
तुम जीत नही हो सकते
मेरे हारे हुए बिना…
गर्म रेत पर चली
स्त्री सदियों से..
चुपचाप गुजरती रही
अँधेरी गलियों से..
तुम धूप नही हो सकते
मेरे छाया हुए बिना..
बातों बातों में काटे
वनवास कई..
सुबह न आयी फिर भी
जगी रात कई…
तुम दीप नही हो सकते
मेरे बाती बने बिना…



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
March 7, 2016

बहुत ही सारगर्भित कविता आदरणीया रंजना गुप्ता जी. आपकी शोधपूर्ण रचना काबिलेतारीफ है. इसी प्रकार अपनी उपस्थिति बनाये रक्खें…सादर!

ranjanagupta के द्वारा
March 7, 2016

आदरणीय जवाहर जी…बहुत बहुत आभार..आपकी सुझाव पर ही चल रही हूँ….आको साधुवाद.. पर अभी ये उपस्थिति एक तरफ ही रहेगी….

Jitendra Mathur के द्वारा
March 8, 2016

महिला दिवस पर शुभकामनाएं रंजना जी । बहुत ही सुंदर रचना है यह आपकी ।

ranjanagupta के द्वारा
March 8, 2016

जितेंद्र जी…आभार…साधुवाद..


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