swarnvihaan

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फुरसत ...

Posted On: 1 Mar, 2016 कविता,Junction Forum में

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जिंदगी तुझसे कभी
फुरसत में मिलना है मुझे…..
दर्द के उठते बगूलों से
निकलना है मुझे …
हर तरफ रेत के
उठते हुए बवंडर है..
बन के पानी किसी
चिनाब का बहना है मुझे…
आग है या तपिश है
नफरतों के शोलों की..
ओस की बूँद सा दिन रात
पिघलना है मुझे…..
खरीदी बेच डाली
रोज ये दुनिया तुमने..
यकीन कर लो मगर
कुछ नही कहना है मुझे…
कभी तो चैन कही
ख्वाब में ही मिल जाये..
दुआ करो की अब
हालात बदलना है मुझे…
रेंगते है मेरी रगों में
जो गुजरे लम्हें ..
ये वही ताज महल है
जहाँ रहना है मुझे….



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
March 1, 2016

सादर आभार आदरणीया ,हम सबके मध्य उपस्थित होने के लिए ,बहुत सुकून भरा और दिव्य उद्देश्य को सजोयें,सरल शब्दों में दार्शनिक काव्य ,पुनःश्च साधुवाद ,नमन |

ranjanagupta के द्वारा
March 1, 2016

पी के दुबे जी..कुछ टेक्निलकल समस्याओं नके कारण ही ये दुरी थी.अभी भी है वे समस्याएं.. पर आप सब का स्नेह आभार बहुत याद आता है..फेसबुक की दुनिया ज्यादा सहज लगी ..अभिव्यक्ति के लिए .पर महत्वपूर्ण तो यह ब्लॉग ही है..सर्वथा..सर्वदा …आपका अभिनदंन …

Jitendra Mathur के द्वारा
March 2, 2016

बहुत सुंदर कविता रंजना जी । अभिनंदन ।

ranjanagupta के द्वारा
March 2, 2016

जितेंद्र जी..सभार …सादर

jlsingh के द्वारा
March 2, 2016

आदरणीया रंजना जी, सादर अभिवादन! काफी दिनों बाद आप इस मंच पर अवतरित हुई हैं. वैसे फेसबुक पर आपकी कविताएँ देखता हूँ पर वहां वो आनंद नहीं अत जो इस मंच पे आता है. कृपया यहाँ भी नियमित पोस्ट करती रहें ….आशावादी कविता के लिए आपका अभिनंदन!

Shobha के द्वारा
March 2, 2016

प्रिय रंजना जी काफी समय के बाद आपकी खूबसूरत रचना पढ़ने को मिली बहुत अच्छा लगा

ranjanagupta के द्वारा
March 3, 2016

शोभा जी ..बहुत बहुत आभार ..आपका..आपके सद्भाव के लिए भी अशेष आभार ..

ranjanagupta के द्वारा
March 3, 2016

जवाहर जी बहुत बहुत आभार..जागरण जंक्शन से अनुरोध है कि इस मंच को सर्वोपयोगी बनाये .मोबाईल और टैब इस्तेमाल करने वालो को भी फेस बुक की तरह ही सहज लगे..और हर कालम ठीक से सरलता से खुले ..अभी भी दूसरों के पोस्ट पर्वकमेंट करने में..और साईट को भलीभांति ऑपरेट करने .में मोबाईल और टैब ..दिक्कते बनी हुयी है..मैं कोशिश करूंगी जवाहर जी..कि यहाँ रचनाएँ पोस्ट करती रहूँ… पर आप लोगो को प्रतिक्रिया न दे पाऊं तो क्षमा कीजियेगा…

Ritu Gupta के द्वारा
March 3, 2016

सुन्दर कविता रंजना जी बधाई

ranjanagupta के द्वारा
March 3, 2016

रितु जी..आभार …

Alka के द्वारा
March 10, 2016

आदरणीय रंजना जी ,बहुत भावुक और मन को छूती रचना बधाई ..

ranjanagupta के द्वारा
March 10, 2016

अलका जी..आभार…

yamunapathak के द्वारा
March 19, 2016

रंजना जी आप बहुत ही अच्छा लिखती हैं . साभार

ranjanagupta के द्वारा
March 20, 2016

अरे वाह… यमुना जी.!..बहुत प्रसन्न्ता हुयी आपकी प्रतिक्रिया से ..आत्मीय आभार….


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