swarnvihaan

कविताये // आमजन स्त्री विमर्श की !!! कहानियाँ //मार्मिक प्र वंचनाओं की !!! विचार // दमित आक्रोश असंगतियो के !!! , लेख // पुनर्जागरण के !!!

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ranjanagupta


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निज भाषा उन्नति अहै..सब उन्नति को मूल..!!

Posted On: 12 Sep, 2016  
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Contest Hindi News Hindi Sahitya में

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बाढ़…..

Posted On: 22 Aug, 2016  
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अवमूल्यन की त्रासदी …

Posted On: 26 Jun, 2016  
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Hindi News Junction Forum social issues में

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महाशक्ति…..

Posted On: 7 Apr, 2016  
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पॉलीथिन और पर्यावरण…

Posted On: 31 Mar, 2016  
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महिलाओं के प्रति नजरिया…….

Posted On: 27 Mar, 2016  
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किसान की चिठ्ठी…….

Posted On: 13 Mar, 2016  
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हवा की सरहदें…

Posted On: 10 Mar, 2016  
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Hindi Sahitya Junction Forum कविता में

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स्त्री…!

Posted On: 7 Mar, 2016  
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Junction Forum Special Days कविता में

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फुरसत …

Posted On: 1 Mar, 2016  
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Junction Forum कविता में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आपके मनोभावों तथा मनोव्यथा को मैं भलीभाँति समझ रहा हूँ माननीया रंजना जी । इस वातावरण को अपनी क्षमतानुसार सुधारने तथा निराशा के अंधकूप में रंचमात्र की ही सही, आशा का संचार करने के लिए हम इतना तो कर सकते हैं कि आने वाली पीढ़ी के प्रतीक अपने नौनिहालों का चरित्र-निर्माण करें । उन्हें वे उदात्त संस्कार दें जो कभी परिवार के बड़े-बूढ़े बालगोपालों को दिया करते थे लेकिन जिनका भौतिक सफलता तथा उपभोक्तावाद के चलते विलोपन-सा हो गया लगता है । उत्तम चरित्र तथा सुसंस्कारों का अभाव ही तो सभी मानव-निर्मित समस्याओं का मूल है रंजना जी । अंधकार में हमारे लिए कोई और दीप भला क्यों जलाने लगा । अपने निमित्त दीप-प्रज्वलन तो हमें स्वयं ही करना होगा । आशा है, आप सहमत होंगी ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जवाहर जी ...नमन आपको ...वस्तु स्थिति बहुत अधिक निराशा जनक है ..मुझे यांत्रिक विकास और वैज्ञानिक उन्नति से अधिक मतलब नही ...जब मनुष्य मनुष्य न रह जाए...जहाँ प्रकृति की मूल संरचना पूरी तरह ध्वस्त की जा रही हो ..जीव जन्तुओं को निर्ममता से ..जघन्यता से मारा जा रहा हो..जल जमीन जंगल को ज़हरीला बनाया जा रहा हो ..प्राकृतिक शृंखला को नष्ट किया जा रहा हो..हम और हमारी पीढ़ियाँ कब तक जियेंगी ? कोई सुनता नही ...पूरा विश्व आत्महत्या के रास्ते पर निकल चुका है...क्या तकनीक...? क्या आकाश में छेद करना ही हमारी विजय है ?हम अब इंसान नही है ...अपरिमित लालसाओं के असंतुलित रोबोट बन चुके है .एक ऐसी दुनिया में जीने को विवश है ...जहाँ मानवीय मूल्यों का कोई मतलब नही ...

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया डॉ. रंजना गुप्ता जी, आपने काफी दिनों के बाद एक झकझोडनेवला लेख लिखा है. लगता है काफी दिनों से संचित अपनी मन की ब्यथा को इस मंच पर उड़ेल दिया है. आप लगता है पूरी तरह से निराश हो चुकी हैं तभी आप कह रही हैं - "आज देश को फिर किसी गाँधी,गौतम और विवेकानंद की जरुरत है !आज देश फिर किसी बड़ी क्रांति की जमीन तैयार कर रहा है !सुलगता जन मानस ,निकट भविष्य में कोई नई संचेतना अवश्य गढेगा !विकास का ,विश्वास का !" आज से लगभग तीन साल पहले अन्ना जी का उदय हुआ था, लोगों ने समझा, आज के युग का गांधी आ गया, उस आंदोलन के फलस्वरूप सरकारें बदलीं, दिल्ली की भी और पूरे देश की भी, परिणाम हम सब देख ही रहे हैं. अब जरूरत महसूस होने लगी है दूसरे गांधी की, अगर हमारे धर्म शास्त्रों मि लिखा है - जब जब होहिं धर्म की हानि......... तो और कितनी हनी होनी बाकी रह गयी है जब भगवान अवतार लेकर आएंगे. ततकाल तो कुछ लोग मोदी जी में विष्णु की तलाश करने लगे हैं, यानी अच्छे दिन आना ही चाहते हैं. फिर आप इतनी निराश क्यों हैं. समेत परिवर्तनशील है, यह समय भी बीत जायेगा. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया रंजना जी, सादर अभिवादन! आपका यह आलेख के साथ सुन्दर कविता आज के सन्दर्भ में अति महत्व्पूर्ण है. आपने प्रयावरण से सम्बंधित अनेक चिंताएं जाहिर की है. विभिन्न पर्यावरण विद इसके निदान में लगे हुए हैं. पर न तो विकास रुकनेवाला है नहीं प्लास्टिक के उत्पादन पर रोक लगाई जा रही है. कभी कभी कोई दूकानदार प्लास्टिक की जगह कागज/ सॉफ्ट थैलियों को देता है पर हम प्लास्टिक इतने आदि हो गए हैं की घर से थैला लेकर नहीं निकलते और ढेर सारी प्लास्टिक की थैलियां लेकर घर लौटते हैं. सब्जी, किरन जिंस सब कुछ प्लास्टिक की थैलियों में मिलाने लगा है. हम सभी आदत से मजबूर हैं. अब तो छोटे छोटे पौधे भी प्लास्टिक थैलियों में ही मिलने लगे हैं. ...पर इतना हम सभी जानते हैं की प्रकृति संतुलन बनाना जानती है, अगर हम नहीं सम्हले तो. परिणाम हर साल दीख रहे हैं. इसीलिये -थोड़ी हरियाली थोड़ी सी छाँव जुटाएँ , शायद बच जाये यह धरती ,चलो अभी से वृक्ष लगायें !! सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

के द्वारा: ashasahay ashasahay

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

प्रिय रंजना जी आपको बहुत बहुत समय बाद ब्लॉग पर देखा बहुत ख़ुशी हुई आपने बहुत अच्छा आज के समय के लिए उपयोगी लेख लिखा जब गऊ माता की उपयोगिता पर बहस छिड़ी है ऐसे ही हम गाय को माता के रूप मैं नहीं देखते वह अन्य पशुओं से अलग हैं " १-गाय के दूध में रेडियो विकिरण से सुरक्षाकी सर्वाधिक क्षमता है ! २-गावों में जिन घरो को गोबर से लीपा जाता है ,उनमे रेडियो विकिरण का प्रभाव नहीं होता !यदि छत को गोबर से लीप दिया जाये ,रेडियेशन का घुसना कठिन हो जायेगा ! ३-यदि गोघृत आग में जल कर धुँआ किया जाये (हिन्दू परंपरा से यज्ञ हवन) तो वायु में रेडियेशन का प्रभाव बहुत कम हो जायेगा ! ४-श्रीशिरोविच ने बताया कि रूस में गाय के पंचगव्य (दूध घी दही गोबर गोमूत्र)पर हुआ हैजो अनेक चर्म रोगों को जीवन पर्यन्त ठीक कर देता है आप ने इन उपयोगिताओं द्वारा गाय के महत्व पर बहुत अच्छा प्रकाश डाला है

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! दिन मंगलमय हो ! आज कई दिनों के बाद आपके ब्लॉग पर आया हूँ ! पहले तो रोज सुबह एक बार आपकी रचनाएँ पढ़ने की आदत थी ! परन्तु इधर काफी दिनों से इस मंच की रौनक ही चली गई है ! आपकी रचना मेरे ख्याल से शायद फीचर नहीं हुई, क्योंकि मैंने वहां देखा नहीं ! मेरी भी पिछली दो रचनाएँ फीचर नहीं की गईं ! अब तो मैं अपने आप से पूछने लगा हूँ -क्या मैं इतना बेकार लिखता हूँ ! दूसरी जगह लिखना शुरू किया तो यहाँ के काफी ब्लागरों को वहांपर देखा ! बहुत ख़ुशी हुई, परन्तु सम्पर्क करने पर आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी को छोड़कर कोई नहीं पहचाना ! मैं खामोश हो गया ! शायद् यही असली दुनिया है ! यूँ ही दुनिया बदलती है..इसी का नाम दुनिया है ! इन दिनों बस मैं चुपचाप लिख रहा हूँ ! क्यों लिख रसः हूँ..किसके लिए लिख रहा हूँ..भगवान जानें ! मुझे ये जानकर बहुत ख़ुशी हुई की आप विभिन्न पत्रिकाओं में लिख रही हैं और अपनी पत्रिका भी चला रही हैं ! शुभकामनाओं सहित !

के द्वारा:

आदरणीय सदुगुरूजी ,सादर प्रणाम ! बहुत आभार ,अभिनंदन !अब कहाँ कहाँ भटकेंगे और कितना समय मिलेगा जीवन में !पता नही पर मैंने अपने साहित्यिक ठिकाने ढूंढ लिए है ,नेट पर भी शुद्ध सहित्यिक पहचान हो रही है और साहित्यिक पत्रिकाओं में भी संभावनाएँ शुरू हो गयी है ,अभी मेरा काम न के बराबर होने से फुरसत है ,इसीलिए अब जोरशोर से लिखना और भेजना सब शुरू कर पायी हूँ !जल्दी ही नतीजे मिलने चाहिए ! वैसे प्रतिक्रिया अच्छी मिल रही है ,मैंने शायद कभी बताया नही ,मैं एक पत्रिका जो सामाजिक साहित्यिक और पारिवारिक है ,वह मेरे साथ एक सज्जन है जो मुख्य संपादक है, हम लोग मिल कर निकालते है !इससे भी काफी अच्छी पहचान मिल रही है !सादर !

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ! इस मंच की वेबसाइट में काफी तकनीकी खामियां हैं ! सुबह के समय ही ये वेबसाइट सही चलती है,बाकी समय तो खुलती तक नहीं है ! आजकल कोई लेख पढ़ना या कमेंट करना मुश्किल कार्य हो गया है ! वेबसाइट के फीडबैक को भी कोई देखने ताकने वाला नहीं है ! शायद इसीलिए ब्लागरों ने अब शिकायत करना ही छोड़ दिया है ! इस मंच पर पाठक तो बहुत हैं,परन्तु पुराने अधिकतर साहित्यकार इस मंच को छोड़ चुके हैं ! अब कमेंट कौन करे ? किसी भी तरह का कोई पारिश्रमिक और साहित्यिक रचनाओं को मंच पर उचित सम्मान न मिलने से आचार्या जी इस मंच से बहुत निराश हो चुके थे ! शायद इसीलिए इस मंच पर लिखना छोड़ दिए ! आदरणीया डॉ शोभा भरद्वाज जी शायद आजकल अपने बच्चो के शादी-विवाह जैसे पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में व्यस्त हैं ! यदि इस मंच के तकनीकी और प्रशासकीय दृष्टि से जारी उपेक्षापूर्ण सञ्चालन में कोई आमूलचूल परिवर्तन नहीं हुआ तो कमेंट की संख्या अब दिनप्रतिदिन कम ही होती चली जाएगी ! आप कमेंट पर ध्यान न देकर बस निष्काम भाव से लिखती रहिये ! इस वेबसाइट पर जब तकनीकी,प्रशासकीय और साहित्यिक दृष्टि से सबकुछ नया,परिवर्तित और कुछ अनोखा होगा वो सुबह भी जरूर आएगी ! प्रतीक्षा कीजिये ! उस सुबह की प्रतीक्षा मुझे भी है ! अंत में आपको हंसाने के लिए एक व्यक्तिगत अनुभव-मैं अपने जीवन में जहाँ भी गया हूँ,वहां परिवर्तन जरूर हुआ है ! कुछ का पुरानापन गया ! कुछ परिवर्तित होकर नया हो गया ! और कुछ मेरे देखते देखते जाने कहाँ खो गया ! पर मैं किसी का साथ छोड़ के गया नहीं ! आप लिखते रहिये ! हमसब लोग प्रतिक्रिया देते रहेंगे !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! सुप्रभात ! नवरात्री का ये शुभ समय आपके लिए और आपके समस्त परिवार के लिए मंगलमय हो ! २ नवम्बर २०१४ के बाद आपको अपने व्यक्तिगत,व्यावसायिक और पारिवारिक जीवन में कुछ विशेष चमत्कारिक परिवर्तन अवश्य नजर आएगा ! यज्ञ के लिए अब कम्प्यूटर के पास से उठने से पहले आपकी नई रचना पढ़ने आया था ! आपके ब्लॉग पर कोई नई रचना तो नहीं है,परन्तु आपसे कहने के लिए एक नई बात जरूर है ! वो ये कि आजकल कांग्रेस सहित मोदी जी के तमाम आलोचक परेशान हैं ! उन्हें मोदीजी आलोचना करने का कोई मुद्दा ही नहीं मिल रहा है ! मोदी जी से नफरत तो समझ में आती है,क्योंकि उनकी ही वजह से आज वो सत्ता से बाहर हैं ! परन्तु देश से नफरत समझ में नहीं आती है ! मुझे तो संदेह होता है कि इन लोंगो को देश से प्रेम भी है या नहीं ? हमारे देश की पटरी पर आती अर्थव्यवस्था डूब जाये,सीमा पर पीछे हटता चीन हमपर हमला कर दे,नियंत्रित होते आतंकवादी अपने नापाक इरादों में कामयाब हो खूनखराबा करें,क्या यही सब वो लोग चाहते हैं ? उन्हें शर्म आनी चाहिए ! मोदी जी से नफरत तो समझ में आती है,क्योंकि उनकी ही वजह से आज वो सत्ता से बाहर हैं ! परन्तु देश से नफरत समझ में नहीं आती है ! मुझे तो संदेह होता है कि इन लोंगो को देश से प्रेम भी है या नहीं ? हमारे देश की पटरी पर आती अर्थव्यवस्था डूब जाये,सीमा पर पीछे हटता चीन हमपर हमला कर दे,नियंत्रित होते आतंकवादी अपने नापाक इरादों में कामयाब हो खूनखराबा करें,क्या यही सब वो लोग चाहते हैं ? उन्हें शर्म आनी चाहिए ! मोदीभक्त न सही कम से कम देशभक्त तो बनें ! देशभक्तिपूर्ण इस रचना के लिए आपका बहुत बहुत अभिनन्दन और आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉ रंजना जी ! दिन मंगलमय हो ! आपकी पहली बार पोस्ट ये कविता मैंने भी देखी थी ! जब दूसरी बार आपके ब्लॉग पर गया तो तो गायब थी ! मुझे लगा कि आपने शायद कुछ सुधार के लिए डिलीट किया हो ! कमेन्ट पढ़कर आश्चर्य हुआ कि वो तो अपने आप डिलीट हो गया ! ये गलत है ! ऐसा होना नहीं चाहिए ! मंच के संचालकगण इस ओर जरूर ध्यान दें ! कई कमेन्ट में कविता की विषयवस्तु को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण की बात की गई है ! मेरे विचार से तो आपकी रचनाएँ ९० प्रतिशत भारतीय नारियों के दुखों का प्रतिनिधित्व करती हैं ! आपकी कविता में सच्चाई छुपी हुई होती है,जो मेरे मन को छूकर बहुत संवेदनशील कर देती है ! आपकी वेदनामयी रचनाएँ पढ़कर अक्सर गहरी साँस खींचकर मैं सोचता हूँ कि काश मैं भगवान होता तो किसी को दुखी नहीं रहने देता ! लोग स्त्रियों को दुर्गा काली बन जाने का सन्देश देते हैं,पर समाज की यथार्थ स्थिति बहुत क्रूर और कटु है ! कल महिलाओं से घिरी इस गांव की एक स्त्री फूट फूटकर रो रही थी ! उसके शरीर पर ताजा जख्मों के निशान थे ! किसी महिला की सलाह पर वो काली बन अपने शराबी और जुआरी पति को सुधरने चली थी,परन्तु वो राक्षस उसका हाथ पैर रस्सी से बांधकर बहुत बुरी तरह से मारा था ! राक्षस जीत गया और काली हार गईं ! यही हमारे समाज की सच्चाई है ! आप यूँ ही लिखतीं रहें,यही शुभकामना है ! बहुत दिनों से निर्मला जी मंच पर अपनी कृत्यों के साथ वैचारिक रूप से अनुपस्थित है ! ईश्वर से प्रार्थना है कि सब कुशल मंगल ही ! अंत में आपको और आपके समस्त परिवार को माँ दुर्गा जी का आशीर्वाद मिले ! नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

आदरणीय रंजना जी, सादर अभिवादन! आपकी कविता रुण झुण रुण झुण की तान सुनाती है ...फिर भी पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है कि एक जगह गेयता बाधित हुई सी लगती है यह मेरी धृष्ठता कह सकती हैं अगर मैं गलत हूँ तब भी मुझे बतला दें और छोटे भाई मानकर क्षमा कर दें हम सब नवसिखुआ हैं इसलिए गलती करते हैं या तुकबंदी भर करने की कोशिश करते हैं पर आप तो आप हैं मै वह पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ जहाँ मुझे बाधा उत्पन्न हुई... आप इन्हे फिर से उच्चारण कर देख लें... कृष्णा की बंशी की ताने , हर घर में गीता बसी हुयी ! और रामचरित के दोहे सी , घट-घट में सीता रमी हुयी ! सादर! आप जरा भी इसे दिल से न या अन्यथा न लेंगी यही उम्मीद करता हूँ.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! दिन मंगलमय हो ! आज सुबह के समय आपके ब्लॉग पर मैं नई रचना पढ़ने आया हूँ ! कोई नई रचना तो नहीं है,हाँ आपका ब्लॉग अवतार जरूर बदल गया है ! नए अवतार में इस मंच पर प्रकट होने की बधाई ! नई रचना के साथ ये प्रकटीकरण और शोभायमान होता ! आपकी रचना में धरातल तलाशना और रचना करते समय जो मनोगत भाव रहे होंगे,उसे ढूँढना मुझे बहुत अच्छा लगता है ! रचनाओं से व्यक्तित्व और मानसिक रुझान का पता चल जाता है ! नई रचनाओं को पढ़कर ब्लॉगर मित्रों का हालचाल मिल जाता है ! मन की जिस गहराई और भाव से रचना की गई होती है,उस गहराई और भाव को जब रचना पढ़ते समय मन छू लेता है तो एक अजीब सा आनंद मिलता है और ये जानकारी भी कि इस दुनिया के रंगमंच पर समय के साथ चल रहे हमारे ब्लॉगर मित्रों का क्या हालचाल है ! सुप्रभात और शुभकामनाएं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी !बहुत बहुत आभार !इतनी चिंता अपने लिए रक्त संबंधो के सिवा किसी में मैंने नही देखी !म्मुझे इस मंच से कुछ मिले न मिले ,आप जैसे सह्दय मनीषी अवश्य मिल गये है ! आज की स्वार्थ से कूट -कूट कर भरी दुनिया में सह्दय परोपकारी मनुष्यों का मित्रो का मिलना दुर्लभ है ! मै भाग्यवान हूँ और मुझे इस बात का गर्व है कि मै आप सब की मित्र हूँ !सादर !साभार !एक पहले अमृत प्रभात करके एक समाचार पत्र आता था ,उसमे और स्चतन्त्र भारत में मेरी खूब कहानियाँ और लेख छपे !1977 से 1999 तक यह सिल सिला च लता रहा !पर बाद में जबसे मैंने 2001 में बिजनेस देखना पूरी तरह से शुरू किया , तब से मुझे समय की समस्या हो गयी !.अब संभवत:फिर पुरानी स्थिति लौट आये ,उच्च शिक्षित पुत्र भी अब नौकरी में शीघ्र आने को है !सब ठीक ही हो जायेगा आपके आशीर्वाद से ! पुनश्च !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया रंजना जी ! अभी मैं यज्ञ करके आ रहा हूँ ! मैंने आप सबके लिए भी दुआ कर दी है ! आप अपनी रचनाएँ प्रकाशित कराईये ! वही सर्वोत्तम रहेगा ! इस मंच पर तो मुझे लगता है कि तीस-पैंतीस साहित्यकार हैं ! वही आपस में एक दूसरे को बधाई दे लेते हैं ! हम सब की रचनाएँ पाठकों तक पहुँच कहाँ रही हैं ! कम से कम दो रचनाएँ प्रतिदिन चुनकर जागरण अख़बार में पूरी छापी जाएँ,तब जाके वो एक बड़े साहित्यिक पाठक वर्ग तक पहुँच पाएंगी ! हमारे आश्रम की प्रत्रिका जब भी छपनी शुरू होगी,उसमे आपकी रचनाएँ मैं जरूर शामिल करना चाहूंगा ! मैं चाहता हूँ कि उसमे छपी रचनाओं पर रचनाकारों को समुचित पारिश्रमिक भी मिले ! हिंदी के साहित्य और साहित्यकारों की कुछ सेवा कर पाने का सौभाग्य ईश्वर मुझे भी जरूर दें ! आप इस मंच पर भी लिखतीं रहें ! आप देखिएगा हमलोगों की दुआएं और शुभकामनाएं एकदिन जरूर रंग लाएंगी ! आपके सफलता के शिखर पर पहुँचने पर हमलोग भी गर्व से कह सकेंगे कि आपको हमलोग जानते हैं ! आशीर्वाद और शुभकामनाएं !

के द्वारा:

फिर कौन सँवारेगा सपने , इन सूनी उजड़ी डालों के ! पंछी अब लौट न आयेंगे , थे केवल मीत उजालों के ! आँसू बन जीवन भारों को ,आखिर कब तक बहना होगा ? डसती है , बातो की घातें ,कब तक यूँ चुप रहना होगा ? जंगल -जंगल दावानल है , सागर-सागर खारा पानी ! हर साँस व्यथाओं की गाथा , राहें सब धुँधली अनजानी ! हिम शिखरों सा यह मौन लिए ,आखिर कब तक गलना होगा ? रेती के नामो सा कब तक , बन-बन करके मिटना होगा ? क्या कहूँ..पढ़कर स्तब्ध और स्तम्भित हूँ ! मुझे तो निशब्द कर दी है आपकी ये रचना ! ये मंच का सौभाग्य है कि आप इससे जुडी हुई हैं ! एक पंक्ति में शायद कुछ गलती है-मरघट तक दीप बझे जाते ! शायद बुझे होना चाहिए ! इस उत्कृष्ट रचना के लिए बहुत बहुत बधाई !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

न पतझड़ होगा न बसंत ! न ह्दय होगा न कौतुहल ! न शब्द न भाषा , न जीवन न मृत्यु ! न बन्धन न मुक्ति की चाह , न सिंहासन होगा , और न ही होगी रक्त पिपासा ! कटु सत्य हैं ये पंक्तियाँ ! इस रचना की प्रशंसा के लिए मेरे पास शब्द नहीं ! बस मैं यही कहूँगा कि हम सब के लिए ये बहुत गर्व की बात है कि आप इस मंच पर लिख रही हैं ! जब ये मंच शुरू हुआ था तो एक से बढ़कर एक महान साहित्यकार इस मंच पर थे ! सब शायद निराश होकर इस मंच से चले गए ! इस मंच पर जो बहुत पुराने ब्लॉगर हैं,उनकी पुरानी रचनाओं को आप देखिये ! उनकी कई उत्कृष्ट रचनाओं पर डेढ़ सौ से भी ज्यादा कमेन्ट हैं ! वो सब आज किसी भी ब्लॉगर के लिए स्वप्न मात्र है ! मुझे लगता है कि जागरण जंक्शन परिवार इस मंच के ब्लोगरों को लेखक और साहित्यकार न मानकर पाठक मात्र मानता है ! यही उसकी सबसे बड़ी भूल है ! मंच के सफल और उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें अपनी भूल में सुधार करने की जरुरत है ! इस अविस्मरणीय रचना के लिए हार्दिक बधाई !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया रंजना जी ! दिन मंगलमय हो ! वर्षा ऋतू का बहुत सुन्दर वर्णन ! आशीष व्योम बरसाता है, खेतों -खेतों सोना संवरे , आंगन-आँगन फिर रुपाली ! जूही चम्पा के नयनों की , मुकलित -अलसित सी मादकता ! आपकी इस रचना का साहित्यिक सौंदर्य लाजबाब है ! इधर सूखे के से आसार हैं ! बदल जमकर बरस ही नहीं रहे हैं ! खेतो में किसान धान बोने को परेशान है और घरों में लोग उमस और गर्मी से परेशान हैं ! आपकी रचना रंग लए और खूब पानी बरसे ! मैं अपनी छत पर बैठकर बादलों को बरसते हुए देखूं और आपकी रचनाएँ पढूं ! वर्षा ऋतू रूपी कुदरत के करिश्मे का साक्षत्कार विधिवत हो ! एक बहुत अच्छी रचना के सृजन के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

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आदर णीय सद्गुरु जी !बहुत बहुत आभार इतनी कृपा और सद्भावना हेतु !आप द्वारा सिद्ध यंत्र और श्रीसूक्त की मुझे प्रतीक्षा रहेगी !मै बचपन से ईश्वर भक्त हूँ !सदाचार परोपकार यह सब माँ पिता द्वारा दिया गया ,संस्कार है !मेरे रक्त में है ! दुनिया का बहुत बड़ा नियम है ,जो जैसा होता है ,वैसे हीलोगो से उसकी भेंट होती है !तभी आप जैसे सद्पुरुष और आदरणीय जवाहर जी जैसे ,लोगो की विशेष कृपा मुझ पर है !आचार्य गुंजन जी,और भाई संजय जी का भी बहुत आभार ! मैंने बचपनसे बहुत साधना और पुरश्चर ण किये है ! ईश्वर कृपा का ,सहयोग का, साक्षात अनुभव सदा किया है ,मेरा जीवन सांसारिक दृष्टि से पूर्ण रूप से बहुत सुखी भी है ,पर संघर्ष बहुत किया है ! एक जीवन के हर क्षण का सदुपयोग कर लेने की जिद के कारण ,बहुत समस्याएँ है !मै श्रीसूक्त का ,लक्ष्मी सूक्त का सदैव् पाठ करती हूँ ! पर किसी की कृपा और सिद्धि उसमें सम्मलित नही है !आपका अनुग्रह मेरे लिए किसी दैवीय चमत्कार के समान होगा !!सादर !!साभार !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया रंजना गुप्ताजी ! सुप्रभात ! दिन मंगलमय हो ! आज एक माह बाद मुझे कुछ विश्राम मिला है ! मैं आज सुबह बहुत देर तक अपनी माताजी के पास बैठा और उनके साथ बैठकर चाय पी ! मैं बहुत सौभाग्यशाली हूँ कि अपनी माताजी का सानिध्य मुझे आज भी प्राप्त है ! आप की कविता मुझे बहुत अच्छी लगी ! ये पंक्तियाँ विशेष हैं-यह कड़ी धूप है जीवन की ,मै कब तक सब चुप चाप सहूँ , किसकी गोदी में छुप जाऊँ ,किससे सीने की घुटन कहूँ ! जब दिन भारी हो जाता है, तब याद तुम्हारी आती है , जब सारा जग सो जाता है , माँ याद तुम्हारी आती है ! बचपन में माँ के सीने से लगने का सुखद एहसास मन में इतनी गहराई तक बस जाता है कि फिर जीवन में किसी के भी सीने से लगो माँ की याद सबसे पहले आती है ! मेरा निजी अनुभव है कि मन माँ के सीने से लगने के सुखद एहसास को पत्नी और मित्रों में ढूंढता है,परन्तु वहांपर उसे ये एहसास नहीं मिलता,क्योंकि वो बहुत निश्छल,पवित्र और स्वार्थरहित होता है ! मित्रों के साथ रहने पर भी ध्यान घर और माँ पर बार बार जाता है ! मेरे संस्मरण को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने के लिए इस समय कई लोग बेचैन हैं ! मुझे बार बार फोन कर रहे हैं कि मैं जल्द से जल्द संस्मरण को पूरा करूँ ! परन्तु पता नहीं क्यों अब मुझे उसे लिखने इच्छा नहीं होती है ! एक महीने से तो अपनी पुरानी डायरी मैंने छुआ भी नहीं है ! बहुत से लोगों के कार्य पेन्डिंग में हैं ! पहले उसे देखना जरुरी है ! लखनऊ में मेरे आश्रम की एक शिष्य हैं-अमिता श्रीवास्तव ! वो वाराणसी आने वाली हैं ! मैं आपके लिए आशीर्वाद और उपहार स्वरुप स्वयं के द्वारा सिद्ध किया हुआ एक श्रीयंत्र तथा पुरुषसूक्त व श्रीसूक्त से युक्त एक छोटी सी पुस्तक भेजूंगा ! दस मिनट समय देकर आप नित्य पुरुषसूक्त व श्रीसूक्त का पाठ श्रीयंत्र के सामने कीजियेगा ! जो आप चाहती हैं उसके पूरे होने का मार्ग और आपकी आर्थिक उन्नति जरूर आपको नजर आने लगेगी ! वर्षों पहले मैं दुखी और परेशान लोगों को ढूंढकर और उनकी परेशानियों के एकदम पीछे पड़कर उनका हित करने का प्रयास करता था ! परन्तु अब बहुत सी सिद्धियों के पास में होने के वावजूद भी पता नहीं क्यों किसी का भला करने की और यहाँ तक कि उससे मिलने की भी इच्छा नहीं करती है ! अनगिनत लोग इसीलिए मुझसे नाराज रहते हैं ! सबको कोई खुश नहीं कर सकता यहांतक कि ईश्वर भी नहीं ! शुभकामनाओ सहित !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी,इस लेख का भाग दो मैंने पढ़ा,जिसपर कमेंट करने की रोक है.मई यही पर लेख के भाग दो की चर्चा कर रहा हूँ.मधुमेह की एक मात्र दवा ‘इंसुलिन ‘है जिसे एक पौंड प्राप्त करने के लिए १० हजार सुअरों का वध करना पड़ता है ! क्या इसका विकल्प नही ढूंढा जा सकता है ?इस तरह मानवीय गरिमा को नीलाम करके हम भिखारी हो गये ! उधार ली हुई अनैतिक दृष्टि ही हमारी तथाकथित’ नैतिकता ‘ बन गई !भारत की खाद्यान्न समस्या के हल के लिए भारतीय अर्थशास्त्री और मांसाहारी मिल कर यह तर्क देते है कि ,जिस देश में प्रति वर्ष लाखो शिशु भूख से तड़प -तड़प कर प्राण दे देते हो ,वहाँ मांसाहार के प्रचलन से अन्न की कमी दूर हो जाएगी !यह तर्क संतुलित मानसिकता का परिचायक नहो है ! ईश्वर ने भारत की धरती को प्रचुर शाक अन्न से भरपूर कर रखा है ,यहाँ का अन्न दाता किसान इतना अन्न उगाता है, कि विदेशो में निर्यात करना पड़ता है ,और सरकार की उदासीनता और उचित संरक्षण के अभाव में लाखो टन अन्न सडको पर बर्बाद हो जाता है ,सड़ जाता है ! अखबारों में बरसात के आते ही गेहूँ सड़ने की खबरे आनी शुरू हो जाती है ! पर सरकारी कसाई खानों को चलाने के लिए इस तरह का दुष्प्रचार जरुरी है ! आखिर क्यों नही सरकार अन्न का उचित संरक्षण करती? क्यों नही समय रहते उसे गरीबों में मुफ्त बाँटा जाता ?नाना प्रकार के ऊल जलूल दिवस मनते है ,पर विश्व करुणा दिवस क्यों नही मनाया जाता ? आखिर कब हम धरती के और जीवो को भी जीने का अधिकार देंगे.बहुत शिक्षाप्रद और उपयोगी लेख.बहुत नहुत बधाई.आपने बहुत परिश्रम और शोध किया है.इतने अच्छे लेख के लिए हार्दिक आभार.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

दैहिक सौन्दर्य की चेतना भी किस बर्बर पागलपन को जन्म देती है ,यह तथा कथित अभिजात्य सौन्दर्य सामग्री के निर्माण में देखा जा सकता है !शेम्पू का परीक्षण खरगोश की आँखों में शैम्पू डाल कर जब देखी जाती है ,तब कई बार खरगोश मर जाता है ! वह अँधा होकर तड़पता हुआ अपने प्राण दे देता है ! कोमल फर वाले पर्स और अन्य एसेसरीज की माँग आपुर्ति हेतु ,सम्बंधित जीवो को जीवित ही बेरहमी से छीला जाता है, क्योंकि मरे हुए जानवर की त्वचा और बाल उतने कोमल नही होते ! इसी तरह उत्तम और बहुमूल्य चमड़े के लिए ,अभागे पशुओ को उच्च तापमान की गर्म जलधारा में अद्यतन झुलसना पड़ता है ! इसी तरह कई अन्य प्रसाधनो के निर्माण की कथा भी अबोध प्राणियों के रक्त में डूबी है !चिकित्सा विश्व विद्यालयों में तो जानवर घर बनाना अनिवार्य होता है ,प्रयोग के बाद उन बेबस प्राणियों को मार दिया जाता है !बहुत शोधपूर्ण लेख,बधाई.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय जवाहर जी ! मै वह बदनसीब साहित्य कार हूँ ,जिसका रचना काल लगभग चालीस वर्षो में फैला होने केबावजूद बहुत कुछ अप्रकाशित उपेक्षित पड़ा है ,इस सबकी जिम्मेदार मेरे जीवन परिस्थितियाँ ,और प्रकाशन के सम्बन्ध में मेरी उदासीनता रही !बहुत सारे वर्ष मैंने केवल शुद्ध व्यवसाय किया !लिखना पढना सब त्याग कर !एक विरक्ति सी है मेरे मन में प्रसिद्धि से !इस लेखन और प्रकाश न के दांव पेंचो से पुरस्कारों की कुटिल नीतियों से बहुत नजदीक का परिचय है !मेरा मोह भंग हो चुका है ,दुनिया की बहुत सारी प्रवंचनाओ से !कब किस काल का लिखा मन कर जाता है ,पोस्ट करदेती हूँ,याद नही !बस आप लोगोका दिया इतना सम्मान और प्रेम है कि पोस्ट कुछ न कुछ कर ही देती हूँ ,सादर आभार !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

बहुत बहुत आभार विजय जी !मेरी कविताये, कहानियाँ सब लखनऊ से प्रकाशित हुयी है !अब तक चार पुस्तके प्रकाशित है ,दो कविता संग्रह ,एक कहानी संग्रह ,व् एक शोध प्रबंध !आप इन्हें कोरियर से मंगवा सकते है!यदि लखनऊ में नही रहते है ! आपको अपना पता यदि चाहे तो इसी साईट पर अन्यथा मेरे इमेल पर देदे ,पुस्तके जो भी चाहे भेज दी जाएँगी !मै किसी और साईट पर नेट पर नही हूँ,यह प्रतिबद्धता नही केवल एक संयोग है ,मै प्रिंट मीडिया से यहाँ हूँ,अत:अधिक नेट सेवी नही हुँ !मुझे खेद है आपको बेवजह परेशान होना पड़ा !यदि लखनऊ में है तो मै गोमती नगर व् कपूरथला के दो पते दे दूँगी वह से आप आसानी से किताबे प्राप्त क्र सकते है !साभार !

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी ! बधाई हो ! आपकी मंच से संबंधित बहुत सी समस्याओं की आज निराकरण हो गया है ! सभी ब्लॉग अब आसानी से खुल रहे हैं ! पोर्टल पर आपका फलसफा भी विराजमान है ! लगता है कि हमारे कमेंट ध्यान से पढ़े जाते हैं ! मंच के स्वजागरण की सुव्यवस्था होनी चाहिए ! आपकी कुंडली की जरुरत नहीं है ! मै वैसे ही आपके नाम से बता दे रहा हूँ कि २ नवम्बर तक थोड़ी बहुत आपकी परेशानिया बनी रहेंगी,चाहे वो शारीरिक हो,पारिवारिक हो या आर्थिक हो ! उसके बाद ही आपको पूरी तरह से राहत मिलेगी ! आप लिखती रहिये,सम्मान की दृष्टि से समय ठीक है ! आप चाहें तो तर्जनी अंगुली में शुक्रवार के दिन ११ रत्ती का ओपल धारण कर सकती हैं ! दुर्गासप्तशती के देवी कवच का पाठ नित्य किया कीजिये ! निश्चित रूप से आपको राहत मिलेगी ! शुभकामनाओ सहित !

के द्वारा:

आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी ! बधाई हो ! आपकी मंच से संबंधित बहुत सी समस्याओं की आज निराकरण हो गया है ! सभी ब्लॉग अब आसानी से खुल रहे हैं ! पोर्टल पर आपका फलसफा भी विराजमान है ! लगता है कि हमारे कमेंट ध्यान से पढ़े जाते हैं ! मंच के स्वजागरण की सुव्यवस्था होनी चाहिए ! आपकी कुंडली की जरुरत नहीं है ! मै वैसे ही आपके नाम से बता दे रहा हूँ कि २ नवम्बर तक थोड़ी बहुत आपकी परेशानिया बनी रहेंगी,चाहे वो शारीरिक हो,पारिवारिक हो या आर्थिक हो ! उसके बाद ही आपको पूरी तरह से राहत मिलेगी ! आप लिखती रहिये,सम्मान की दृष्टि से समय ठीक है ! आप चाहें तो तर्जनी अंगुली में शुक्रवार के दिन ११ रत्ती का ओपल धारण कर सकती हैं ! दुर्गासप्तशती के देवी कवच का पाठ नित्य किया कीजिये ! nishchit रूप से आपको राहत मिलेगी ! शुभकामनाओ सहित !

के द्वारा:

आदरणीय सद्गुरु जी !याद करने के लिए बहुत बहुत आभार !!मै किसी न तो ब्लाग खोल पाती हूँ ,और न ही किसी को पढ पाती हूँ !और न ही मेरे पोस्ट को कोई पोर्टल मिलता है !बस कोईभी संवाद स्थापित करने के लिए ,केवल मेरा यही ब्लाग बचता है !जागरण की साईट में बहुत अधिक समस्या है !बेहद स्पीड वाला नेट वाई फाई सिस्टम वाल भी यहाँ बेकार हो गया है !मैंने आपको ,जवाहर जी को ,डा ० स्वस्तिक को कई बार बेहद मुश्किल से कमेन्ट किये ,पर शायद कही नही पहुंचे !मै चेक भी शायद ही कर पाऊँ ! ऐसे में लिखनेका कोई फायदा हो तो बताइए ! देखेंगे कुछ सही हुआ तो लिखंगे !!मेरी जिंदगी में वैसे भी कुछ ज्यादा दिन ठीक नही रहता ! सोचा था आपको अच्छा ज्योतिष ज्ञान है,अपनी कुंडली भेजूँ ! सादर!!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीया रंजना जी, सादर अभिवादन! मुझे दुःख है कि इतनी अच्छी कहानी को पढने में मैंने एक सप्ताह का समय लगा दिया. शीर्षक और फीचर्ड ब्लॉग के शीर्ष पर देखते हुए भी अनदेखा करता रहा ...कुछ समय का अभाव और सद्गुरुजी के अनुसार वर्तमान राजनीति में रूचि..एक अनुमान मैं भी शुरू से लगा रहा था, जिसे गुरूजी ने भी चिह्नित किया है.. शायद इस कहानी का सार आपकी जिंदगी से ताल्लुक जरूर रखता होगा. अक्सर हम अपने मनोभाव को प्रकट करने के लिए कहानियों कविताओं का सहारा लेते ही हैं....फिर भी कहानी का सुखांत होना और सहज ढंग से प्रस्तुति एक सांस में पढ़ लेने कि रोचकता पैदा करता है ...मैंने पहले भी आपको लिखा है, आप जरूर लिखें और हम सबको अपना अनुभव, मनोभाव, विचार बताते रहें. हम सभी एक दूसरे को पढ़ें समझें जाने यही तो मंच की विशेषता होनी चाहिए. ...एक बात और हम सभी पार्ट टाइम लेखक और पाठक हैं ...पहला काम है, अपनी रोजी रोटी का जुगाड़....जिनसे हम नियमित रूप से बंधे होते हैं ... जितना समय निकल पाता है उसी में ब्लॉगिंग, पठन, वाचन, श्रवण होता है. आपकी यह कहानी श्रेष्ठ है ...बस इतना ही कहना चाहूँगा ...बधाई और हार्दिक अभिनंदन!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: skjaiswalskj skjaiswalskj

आदर णीय जवाहर जी !हार्दिक अभिनन्दन !आपका संवेदना सद्भावना से परिपूर्ण स्मरण मन को बहुत गहराई तक भिगो गया !आपका कहना सत्य है सद्गुरु जी भी बेहद भावुक और सुधारात्मक दृष्टिकोण के संत पुरुष है !वे मेरे प्रति गहरी संवेदना रखते है !उनकी प्रेरणा से ही मै अब तक मंच पर उपस्थित हूँ,लेकिन एक बात उनकी और भी ठीक लगी कि यह मंच राजनैतिक गतिविधियों को ही सर्वाधिक रेखांकित करताहाहै मै तो पूर्ण रूप से अ साहित्यिक रचना कार हूँ !कभी कभार ही अपने खोल से बाहर निकल कर अन्यथा लिखती हूँ ,रचनाओ के पाठक सैकड़ो से हजारो तक है !पर प्रतिक्रिया अधिक नही मिलने से उहापोह की स्थिति बनी रहती है !जागरूक साहित्यिक रूचि और समझ के लोग बहुत थोड़े है !ऐसा मेरा मानना है ,आप जैसी सह्दयता तो वास्तव में दुर्लभ है ! सतर्क और तीखी दृष्टि के अभाव में यह मंच अपनी गरिमा खो रहा है ,काश इतनी सहज और सुन्दर व्यवस्था अराजकता का शिकार न होती !कितना अच्छा होता ! आपका बहुत बहुत आभार ! शेष फिर...!! इ

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

आदरणीय सद्गुरु जी तथा आदरणीया रंजना जी, यथोचित अभिवादन! आपदोनो की प्रतिक्रिया और विचार पढ़कर मन को बड़ा सकूँ मिलता है आपलोग बड़े सहृदय और भावुक भी हैं.. मंच के सभी ब्लोग्गर्स में आपसी सद्भवा होना चाहिए यह बहुत अच्छी बात कही है आपने! एक समय था भी ...लेकिन कहते हैं न! जो होता है उसके करक हम ही होते हैं. कभी कोई निमित्त बन जाता है. मैं पहले भी बता चूका हूँ, बहुत सारे अच्छे लोग जिनमे भावनात्मक लगाव सा था इस मंच को अलविदा कह चुके हैं और फेसबुक पर या अलग कोई साइट बनाकर क्रियाशील हैं. रंजना जी के शारीरिक और मानसिक कष्ट के लिए मेरी हार्दिक संवेदना ... दूसरा !लगता है उर्जा यहाँ व्यर्थ नष्ट हो रही है-- तो इसके जवाब में मैंने एक अंग्रेजी में कविता पढ़ी थी इंटर में - उसका अर्थ (तात्पर्य) बता रहा हूँ ... हो सकता है आपलोगों ने भी पढ़ी हो.- एक कवि जंगल में जाकर एक गीत गाता है और उसी जंगल में वह एक तीर बिना कोई लक्ष्य के छोड़ता है. ...वर्षों बात वह कवि उसी जंगल से गुजर रहा होता है तो एक पेड़ में उस तीर को घुसा पाता है, जब उसने तीर को पेड़ से बहार निकला उसके गीत की पांकी भी सुनाई पड़ती है ..तात्पर्य यही है की कोई भी प्रयास ब्यर्थ नहीं जाता ... आप अपने मन का भाव विचार अवश्य प्रगट करें ... कोई तो होगा सुनाने समझनेवाला ...और ज्यादा मैं के कहूँ आप लोग स्वयं विद्वान हैं मैं तो ऐसे ही टांग अदा देता हूँ क्योंकि मुझे आप लोगों की रचनाएँ, भावनाएं अच्छी लगती है. प्रतिक्रिया देनेवाले से जयादा लोग आपकी रचनाओं को को पढ़ा होगा ऐसा आपलोगों ने भी महसूस या होगा.... बस ...सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

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के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

अगले ही पल सुष्मिता की गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी !दूर समुन्द्र की उछलती चमकती लहरों में बार -बार उसको अपने पिता का चेहरा,दिखाई दे रहा था !जो उससे कह रहे थे ,कि’ झूठ और बेइमानी की आयु जितनी विद्युत रेखा के समान चका चौंध भरी होती है ,उतनी ही क्षणिक और विनाश कारी भी होती है ,जो स्वयं तो जलती ही है , साथ में दूसरों का घर भी जला देती है !!’आदरणीया रंजनाजी,इस बहुत प्रेरक रचना के लिए बहुत बहुत बधाई.कहानी की नायिका सुष्मिता के पात्र में आपके अपने जीवन की भी कुछ झलक मुझे दिखाई देती है.मुझे आपकी ये कहानी बहुत पसंद आई.इस मंच पर लोगों का रुझान राजनीती की ओर ज्यादा है,इसीलिए अच्छी रचनाएं लोग पढ़ने से वंचित रह जाते हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी,उम्मीद है कि टाइफाइड और अर्थ राइटिस से आपको छुटकारा मिल गया होगा.आप भुना हुआ तीसी या अलसी (फ्लेक्स सीड) दो चम्मच रोज खाएं.ये अर्थ राइटिस की बीमारी को जड़ से दूर करता है.आज इस समय मंच पर टहलने का मुझे मौका मिला है.मेरे बाएं हाथ की कोहनी में आज दोपहर के समय उसके यहाँ मामूली चोट लग गई है.लेकिन बहुत तेज दर्द है.हालाँकि कोई सूजन या फ्रैक्चर नहीं है.मैं एक ब्लॉग पर गया था,जिसमे ब्लॉगर ने जीवन से दुखी होकर ईश्वर से प्रार्थना की थी कि मैं जीना नहीं चाहता.अपनी ये दी हुई जिंदगी वापस ले लो.वो ब्लॉग पढ़कर मुझे बहुत बहुत दुःख हुआ.मंच के संचालकों को ऐसे ब्लॉगेरो को जीवन जीने हेतु प्रेरित करने के लिए उन्हें सकारात्मक सुझाव देना चाहिए और सभी ब्लागरों से एक भावनात्मक लगाव रखना चाहिए.कोई ब्लॉगर बीमार है या बहुत दिनों से मंच पर अनुपस्थित है तो मंच के संचालकों को उससे सम्पर्क करना चाहिए.ये मंच एक मशीन बन के रह गया है.किसी भुतहा हवेली की तरह से तीन चार दिन तक कुछ अपडेट ही नहीं होता है.मुख्य पेज के समाचारों की हेडलाईन देखिये,वो पंद्रह बीस दिन पुरानी हैं.जागरण जंक्शन परिवार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और इस मंच को एक जीवंत ओर सक्रीय मंच बनाना चाहिए.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी,नवरात्री की शुभकामनाएं.कई दिनों बाद आपकी एक नई रचना पढ़ी.कविता में आपके मन का दर्द झलकता है.ये पंक्तियाँ मैंने कई बार पढ़ीं-गलियों में दौड़ रहा ,पागल अँधियारा पन , होता क्या है ? सूरज के रोज निकलने से ! धर दो इस खुली हथेली पर ,विश्वास एक , जिसके नन्हे उजियारे से, आकाश सजाना है मुझको ! मन को चुभती हुईं पंक्तियाँ.एक गीत की कुछ पंक्तियाँ मुझे याद आ गईं-क्या दर्द किसी का लेगा कोई,इतना तो किसी में दर्द नहीं.बहते हुए आंसू और बहें,अब ऐसी तसल्ली रहने दो.या दिल की सुनो दुनियावालों या मुझको अभी चुप रहने दो मैं ग़म को खुशी कैसे कह दूँ जो कहते हैं उनको कहने दो.ये मंच मुझे अक्सर अजीब सा लगता है.यहांपर तो एक ही सूत्र है जो लिख रहा है उसे याद रखा जाता है.जबकि एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जो अपने घर में बीमार हैं या फिर बहुत दिनों से लिख नहीं रहे हैं,उनका भी हालचाल हम जान सकें.किसी भी मंच का एक बड़ा उद्देश्य होना जरुरी है,नहीं तो वो निरर्थक है.मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप शीघ्र से सीघ्र पूर्णत: स्वस्थ हों और आपकी सभी पारिवारिक समस्याएं अतिशीघ्र हल हों जाएँ.सादर हरिस्मरण.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी,सादर अभिनन्दन ! आप लिखती रहें,जरा भी निराश न हों.मुझे लग रहा है कि मंच की कुछ तकनीकी समस्या है,जिसके कारण आपकी रचना फीचर नहीं हो पा रही है.मंच पर रचनाओ की बाढ़ सी आ गई है.साहित्यिक दृष्टि से गुणात्मक नहीं बल्कि मात्रात्मक वृद्धि हो रही है.कई ब्लॉगर हर रोज चार पांच ब्लॉग पोस्ट कर रहे हैं,जिसमे से एक फीचर हो रही है.इस तरह से बीस ब्लॉगर यदि ऐसा करेंगे तो हफ्ते में एक दो ब्लॉग पोस्ट करने वालों की रचना कैसे फीचर होगी.इसीलिए मैंने मंच को सुझाव दिया था की मंच पर साहित्यिक दृष्टि से गुणात्मक सुधार हेतु किसी भी ब्लॉगर द्वारा प्रतिदिन ब्लॉग पोस्ट करने पर पाबंदी लगाई जाये.उस लेख को फीचर किया गया होता तो बहुत से लोग अपना विचार व्यक्त करते ओर एक बड़ी बहस मंच के सुधार के लिए होती,परन्तु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ.जागरण जंक्शन परिवार से मेरा अनुरोध है कि इस ओर ध्यान दे.बहुत से लोगों को ऐसी शिकायत है.काशी में जल की वर्षा हो रही है ओर मंच पर आपके गुस्से की वर्षा हो रही है.आप लिखती रहें.मेरे जैसे बहुत से पाठक आपकी रचनाये हमेशा पढ़ते हैं और भविष्य में भी हमेशा पढ़ते रहेंगे.आपकी रचनाओ का सदैव सादर अभिनन्दन !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आपने बहुत उच्च स्तरीय ज्ञान वप्रेम की अंतिम पराकष्ठा के विषय में लिखा !हम ईश्वर को जिस रिश्ते में बांध ना चाहे ,वह हमारे प्रेम की पावनता के वशीभूत होकर,उसी बंधन में बंधा चला आता है ! मीरा का प्रेम भिन्न प्रकार का था! वे उन्हें अपना पति बचपन से ही मान चुकी थी !फिर उनके लिए विश्व में अन्य पुरुष था ही नही !यही तो स्त्री धर्म है !लेकिन यह प्रेम दिव्य प्रेम था ,सांसारिक वासना से रहित ! प्राय: भक्त गण उन्हें ,अपना स्वामी मानते रहे है !(क्योंकि आत्मा स्त्री लिंग मानी जाती है )जैसे कबीर !सूफी मत वाद में यही दार्शनिक प्रेम कीस्थिति, विपरीत रूप में हो जाती है !वास्तव में ईश्वर न स्त्री है न पुरुष !'न सो रमण न हामि रमणी '(राय रामानंद )!हम सब उस चेतन सत्ता के स्फुलिंग मात्र है ! बस विश्व में प्रेम ही एक ऐसी वस्तु है,जिससे वः परम सत्ता किसी भी रूप में उदभासित हो सकती है बहुत बहुत आभार !भाई संजय जी !आपका सम्बोधन बहुत आत्मीय है! और यह जिज्ञासा बहुत पावन !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

के द्वारा: sanjay kumar garg sanjay kumar garg

"लोक जन शक्ति पार्टी और तेलगुदेशम जैसी बड़े जनाधार वाली पार्टियों का समर्थन" वाह रंजना जी ! मोदी प्रेम तो ठीक है, लेकिन सच से आँख नहीं फेरनी चाहिए! शायद आप इन दोनों पार्टियों के जनाधार के विषय में ज्यादा नहीं जानते. लोक जन शक्ति पार्टी के सबसे बड़े नेता स्वयंभू दलित रामविलास पासवान जी पिछला लोक सभा चुनाव खुद हार चुके हैं. और उनकी पार्टी को १ भी सीट नहीं मिली थी. बाद में कांग्रेस की मेहरबानी से राज्यसभा में पहुंचे थे. इस बार उनका बी जे पी की तरफ झुकाब उनके सुपुत्र और अभिनेता चिराग पासवान को कांग्रेस से गठबंधन में सीट नहीं मिलने कि शंका के कारण हुआ है. चाहे सही हो या गलत प्रभावी लेखन के लिए बधाई........

के द्वारा:

आदरणीय सद्गुरु जी !प्रणाम !सहारा को अपनी गलतियाँ पता है !जो लोग बड़े स्तरों पर उनका बचाव कर रहे है ,वे कही न कही उनसे लाभान्वित भी है ,और उनका धन भी सहारा में बल्क में समायोजित होगा !इसी लिए सुब्रतो राय भी,उनका नाम न ले सकते होंगे !और उन्हें ही सेबी फर्जी इनवेस्टर बता रहा है !अमिताभ जी ने जब ए बी सी एल की मुसीबत में फंसे थे ,और जब उबरे ,तो कहा था ,कि सुब्रतो राय सहारा के घर में यदि कभी झाडू पोछा भी लगाना पड़े,तो मै लगाऊंगा ,मै ही जानता हूँ ,कि उन्होंने मेरे लिए क्या किया है !ऐसे बहुत से हजारो लोग है ,मुझे तो बड़ी फ़िक्र उन लोगो की है ,जो सहारा से जुड़े है !वे तो बिलकुल निर्दोष है ,और फिर हमारा कानून भी तो मूल रुप से इसी सिद्धांत पर आधारित है ,किदस गुनहगार भले छूट जाये पर किसी निर्दोष को सजा नही होनी चाहिए !सहारा के लिए इतना पैसा वापस करना अत्यंत सरल है !पर इस कम्पनी को डूबना नही चाहिए ,गलतियों को सुधारा जाना चाहिए !दोषी तो बहुत से लोग है ,पर जिनसे लाखो लोग रोजी रोटी पाते है ,उनका हित अहित देखना भी कानून का काम है !आपकी बातो में तथ्य है ,पर पूरा सत्य नहीं !सहारा मेरी आँखों के सामने है !उसकी अच्छा इयाँ भी लोगो के सामने होनी चाहिए ,लेख का एक मकसद यह भी था !वहाँ कोई गलत धंधा बिलकुल नही होता मैने जो लिखा ,वह बिलकुल सच है ! लोग बहुत तनाव में है !स्थिति विस्फोटक न बन जाये ,मुझे यह भी आशंका है !साभार !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

अब आगामी लोकसभा चुनाव अप्रत्याशित नतीजे लाने वाला है ! देश को संभवत:सुशासन देने वाला ,दुश्मनों को भरपूर सबक सिखाने वाला ,जन मन को उनकी समस्याओ से निजात दिलाने वाला ,नेतृत्व मिल ही जायेगा !! आदरणीय रंजना जी, सादर अभिवादन! हमें आशा यही करनी चाहिए. देश बदलाव चाहता है, पर तेलगुदेशम और लोकजनशक्ति का इतिहास भी सबको पता होना चाहिए. ये सभी अवसरवादी हैं और मोदी की लोकप्रियता के कारण ही एन डी ए का घटक बन रही हैं. लोक जन शक्ति का जनाधार ज्यादा नहीं है, पर गठबंधन का फायदा दोनों को जरूर मिलेगा, वहीं इन दलितों के मिलने से बिहार के अगड़ी जाती के नेता नाराज हुए हैं यह भी देखने को मिल रहा है. सब कुछ भविष्य के गर्भ में है काफी लोग जहाँ विकास कम हुआ है नरेंद्र मोदी को प्रधान मंत्री के रूप में जानने लगे हैं ...ऐसा पत्रकारों के साक्षात्कार से पता चलता है...मिलाजुलाकर अच्छा विश्लेषण है बुद्धिजीवियों का राजनीति से भागने से ही राजनीतिक ब्यवस्था दूषित हुई है आप अपना विचार अवश्य व्यक्त करें सादर! .

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया रंजनाजी,सुप्रभात ! आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है.इसके लिए आपको बधाई.सहारा से मेरा पुराना परिचय है.बहुत सी गलतिया सहारा से हुई है.निवेशकों के फर्जी खाते सबसे बड़ा अपराध है.आप फर्जी खाते खोल करके अपना ही पैसा जमा करते जा रहे हैं.अब निवेशकों को लौटाएंगे कैसे.निवेशकों का तो अता पता ही नहीं नहीं है.बीस हजार करोड़ रूपये सेबी को देने का मतलब है अपनी जेब से उतना पैसा देना.रंजना जी आप बहुत दयालु और भावुक हैं.आपने लाखों कर्मचारियों का हित सोचकर ये लेख लिखा है.लेकिन आप सहारा की गलतियों से अवगत नहीं हैं.कानूनन वे बहुत बुरी तरह से इस केस में फंस चुके हैं.आपका लेख पढ़कर मुझे हंसी आ गई.छोटे बच्चे की तरह आपके मासूम मन का मासूम लेख,परन्तु कानून भावनाओं से नहीं चलता है.मोदीजी को या किसी ईमानदार व्यक्ति को आप एक बार प्रधानमंत्री बनने दीजिये,फिर आप देखिये कि बहुत सी कम्पनियों या ओद्योगिक घरानों की पोलपट्टी कैसे खुलती है.सब मिल करके आम जनता को ही लूट रहे हैं.बिना नेताओं की सांठगांठ के न तो कोई फर्जी कम्पनी खुलती है और न ही जनता की खून पसीने की कमाई ले के भागती है.देश में चल रहीं सभी कंपनियों और सभी ओद्योगिक घरानो की ईमानदारी से जाँच हो तो अधिकतर कम्पनियाँ कानून के शिकंजे में फंसी नजर आएँगी.मैंने सच्चाई बयान की है.यदि आपके भावुक मन को ठेस लगी हो तो मुझे क्षमा कीजियेगा.दिन सफल और मंगलमय हो.

के द्वारा:

विजय जी !बहुत बहुत आभार !बहुत अच्छा ,आपने मेरी रचनाओं के प्रकाशन के सम्बन्ध में जानकारी चाही !मेरी रचनायें लखनऊ में दो जगह से प्रकाशित हुयी है !दो कविता संग्रह औए एक कहानी संग्रह व् एक शोध प्रबंध डा०सूर्य प्रसाद दीक्षित जी ने अपने प्रकाशन से प्रकाशित कराया है ,अभी कुछ लेखो के संग्रह प्रकाशित होने को है ,आप मेरी किताबे सहजता से पुस्तक मेले में जो लखनऊ में प्रतिवर्ष दो बार लगता है ,वहाँ मनसा पब्लिकेशन के स्टाल से प्राप्त कर सकते है !वैसे आप मुझे अपना पता ठीक प्रकार से दे ,जो भी चाहिए वह पुस्तक मै आपको कोरियर भी कर सकती हूँ !यदि आप चाहे !पुस्तकों के नाम है -रजनी गन्धा (काव्य संग्रह ,परिंदे(काव्य -संग्रह ),रस भावाद्वैत और हनुमान प्रसाद पोद्दार-(शोध प्रबंध ),और स्वयं सिद्धा -(कहानी संग्रह) !!बहुत धन्यवाद !!

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

सद्गुरु जी प्रणाम !बहुत कहना सुनना है ,पर क्या कहें समझ नही आता !इस ब्लाग की मंशा मेरी बुद्धि से परे है !आपने मुझे जो गलती बताई, वास्तव में मुझे ध्यान ही नही आया ,और इतनी बड़ी गलती हो गई !,आपके ध्यान दिलाने के बाद , मैंने सुधार दिया है !आपका बहुत बहुत आभार !और हार्दिक धन्यवाद ,मेरे मार्ग दर्शन हेतु ,और लेख की सराहना हेतु ! बात मोदी की थी ,अत:लिखने का मन हो आया वरना मुझे अच्छा नही लगता ,राजनीति पर लिखना !ब्लाग पर मै लगातार लिख रही हूँ ,पर सात या छह लेख है ,व् कविता भी जो पोर्टल पर नही आई !बल्कि कहना चाहिए ,कि बीस फरवरी के बाद कुछ भी नही ,पोर्टल पर आया !लगता है ,श्रम व्यर्थ कर रहे है !आज एक लेख जरुरी डालना है ,चाहे जैसे भी !पर अब आगे ,बहुत सी कहानियाँ फाइनल करनी है !पत्रिकाओं में देने हेतु !उसके लिए समय निकलना अनिवार्य है ,वरना ब्लाग की भूल भुलैया में ,मै अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक जाऊँगी !न इधर ही कोई महत्त्व रहेगा ,और मुख्य साधना भी मेरी ,इस छोटे से जीवन में समयाभाव के कारण, अधूरी रह जाएगी !आपको पुन:आभार !!

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आदरणीया डॉक्टर रंजनाजी,सुप्रभात और दिन मंगलमय हो.मैं पोर्टल पर आपकी रचनाओ का इंतजार कर रहा था,जो कई दिनों से बिना किसी बदलाव के रुका हुआ है.मैंने बहुत से सुझाव मंच को दिए थे,पर उस लेख को फीचर करके पोर्टल पर दिखाया ही नहीं गया.आपका लेख मैंने बहुत ध्यान से पढ़ा है.आपने मेरे मन की बात कह दी है.अब सोचता हूँ कि इस विषय पर अभी न लिंखू.मैं बाद में लिखूंगा.लेख की ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आईं-"आप’जैसी ईमानदार पर अधकचरी पार्टी को अभी राजनिति का क ख ग सीखना बाक़ी है ! प्रशासनिक क्षमता से रहित ,अनुभव हीन इस तात्कालिक पार्टी ने परोक्ष रूप से ही सही भाजपा को ,बहुत लाभ पहुँचाया है ! विशेष रूप से केजरी वाल के असमय इस्तीफे की बचकाना हरकत ने ,उनके प्रति समर्पित और आशन्वित जनता की आँखे खोल दी है !अभी इस प्रयोगात्मक पार्टी को , सफल होने के लिए एक लम्बा सफर तय करना बाक़ी है ! ऊपर से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की बौरानी हरकतों ने भी नरेंद्र मोदी का ,भाजपा का बहुत कल्याण किया है !मनीष तिवारी ,दिग्विजय ,और सुशील शिंदे आदि कुछ नाम है ,जिन्हें संतुलित भाषा नही आती !राहुल जी ने अपने अपरिपक्व बयानों ,और अगम्भीरता से निराश किया है !वैसे भी जनता उब चुकी है ,इस निस्तेज शासन से ! विहंगम भारतीय जन चेतना को अपनी उम्मीदों से सरोकार है !जिसे पूरा करने का वादा करने वाले को ,वादा पूरी कर्मठता और उर्जस्विता से ,सच्चाई और ईमान दारीसे निभाना होगा !!तभी कुशासन से क्षुब्ध जन मानस राहत भरी साँस ले पायेगा !"इस लेख के लिए आपको बहुत बहुत बधाई.लेख में एक जगह पर गलती है,इसे जरुर ठीक कर लीजिये.वो गलत पंक्तियाँ हैं-" लोक जनशक्ति पार्टी ,तेलगु देशम् जैसी बड़े ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जनाधार वाली पार्टियों के भाजपा में विलय से ही ,मोदी की शक्ति का अंदाजा किया जा सकता है ! ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ "इन पार्टियों का भाजपा में विलय नहीं हुआ है,ये लोग राजग में शामिल हुए हैं,जिसमे भाजपा भी शामिल है.इस अच्छे लेख के लिए आपको पुन:बहुत बहुत बधाई.इस राजनितिक लेख के लिए बहुत बहुत शुभकामनायें.

के द्वारा: sadguruji sadguruji